कार नहीं संस्कार भी दे
हमारे बच्चे जीवन के अनमोल निधि होते हैं बच्चों का इस दुनिया में आना बच्चों की नहीं हमारी नियति होती है बचपन से ही उनके हर सुख दुख हर दर्द का एहसास एक मां बाप से अधिक कोई नहीं कर सकता लेकिन कई बार ऐसा होता है कि उनको अधिक सुख देने की जहां में हम उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने लगते हैं बच्चे का भविष्य बनाने के लिए उसका वर्तमान संभालना बहुत जरूरी है आजकल दिखावे की होड़ में हम अपने बच्चों को वह सब कुछ देना चाहते हैं जो दूसरे के पास है लेकिन हमारी सर्वप्रथम जिम्मेदारी है कि पहले हम उससे इस योग्य बनाए कि वह हमारी दी हुई सुविधाओं का अनुचित प्रयोग ना करें अगर आप काम करके थक गए हैं और आपका बच्चा आपके पास प्यार से आकर आपको यह पूछा लाओ मां या लाओ पापा मैं आपकी मदद करूं तो समझ लीजिए उसमें संस्कार अभी जिंदा है।। एक बार की बात है हम दिल्ली एयरपोर्ट से आ रहे थे रात का समय था मेरे दोनों छोटे बेटे हमारे साथ थे डाइवर गाड़ी चला रहा था मेरे हस्बैंड आगे बैठे हुए थे हमारे आगे गाड़ी जा रही थी जिसमें शायद कोई रईसजादा था वह तेज गाड़ी दौड़। रहा था ड्राइवर ने दो बार गाड़ी साइड भी की लेकिन वह तभी बहुत तेजी से जा ...