जिंदगी की पाठशाला
इस लाक डाउन की अवधि में जिंदगी ने बहुत से लोगों को बहुत से सबक सिखाएं जो अपने परिवारों से दूर थी वह लौट लौट कर घर को आए आदमी सुबह निकल जाता था रात को घर में आता था उसको शायद पता भी नहीं होता होगा कि घर में उसके पीछे कितना कुछ चलता रहता है एक स्त्री सुबह से लेकर शाम तक अपना घर सजाती है सबकीसुविधाओं का ध्यान रखती है लेकिन जब एक पति इतने लंबे समय तक अपने घर पर रहा तब से यह एहसास हुआ कि वास्तव में जिंदगी में काम के अलावा भी बहुत कुछ है -तीन दिन तक तो जरा अपने मोबाइल में उलझा रहाअपने आप से लड़ता रहा ।लेकिन धीरे-धीरे उसने समझना शुरू किया ,पत्नी की मदद की, बच्चों को प्रेम किया बच्चों के साथ मिलकर बैठे गेम खेलें बहुत सारी बातें साझा कीं और वह बच्चे भी जो शायद जिंदगी की भाग दौड़ में अपना करियर बनाने के लिए बाहर नौकरियां कर रहे थे पढ़ाई कर रहे थे अपने घरों को लौट कर आए तो एक नया ही वातावरण निर्मित हुआ और इस वातावरण में सारे अपने थे। वही बच्चे अपने माता-पिता के कामों में हाथ बटाते दिखाई देनसामाजिक स्थिति से भले ही हम दूर हुए हो लेकिन शर्तिया अपने पारिवारिक जीवन में हम एक दूसरे से और ज्यादा जुड़ गए हमें एहसास हुआ कि घर में जो एक स्त्री है पूरे परिवार की धुरी उसके चारों ओर घूमती है इसे इस कठिन समय में भी हर तरह से मदद करके चाहे वह आर्थिक हो मानसिक हो अपने परिवार वालों को घर से ना निकलने देकर लाक डाउन को अपने परिवार की सुरक्षा चक्र में बदल दिया
। सड़कों पर भागती भीड़ तो थी पर मदद करने वाले हाथ भी हैं। जहां एक और सरकार प्रशासन अपनी पूरी शक्ति लगा रहा है वहीं दूसरी ओर पुलिस डॉक्टर नर्सेस और जितने भी सेवा में लगे हुए लोग हैं वह अपनी पूरी क्षमता के साथ देश की सेवा कर रहे हैं और कम से कम मृत्यु दर रहे इसके लिए पूर्ण प्रयास कर रहे हैं और हम जल्दी ही इस स्थिति से निकल जाएंगे और परिवार फिर से मुस्कुराएंगे
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